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12 Prasang · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐदण्डक वन में प्रवेशPrasang 1
  2. ॐविराध वध और शूर्पणखा का प्रसंगPrasang 2
  3. ॐस्वर्ण मृग और माता सीता का हरणPrasang 3
  4. ॐऋषि-मुनियों का सानिध्यPrasang 4
  5. ॐजटायु से भेंट और सुरक्षाPrasang 5
  6. ॐशबरी की भक्ति और प्रतीक्षाPrasang 6
  7. ॐखर-दूषण वधPrasang 7
  8. ॐस्वर्ण मृग और मारीच का प्रपंचPrasang 8
  9. ॐसीता हरण और जटायु का बलिदानPrasang 9
  10. ॐप्रियतमा की खोज में व्याकुलताPrasang 10
  11. ॐशबरी की भक्ति और प्रभु का आगमनPrasang 11
  12. ॐमैत्री की ओर प्रस्थानPrasang 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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