ग्रंथसार
विधाता की लीला के अनुसार, स्वर्ण मृग का आभास ही उस घटना का द्वार बना, जो मर्यादा पुरुषोत्तम की अग्नि परीक्षा का कारण बनी।
अरण्यकाण्ड · प्रसंग 3
स्वर्ण मृग और माता सीता का हरण