ग्रंथसार
जंगल की पगडंडियों पर वर्षों की प्रतीक्षा, एक भक्त के प्रेम में मिठास बनकर घुल गई।
अरण्यकाण्ड · प्रसंग 6
शबरी की भक्ति और प्रतीक्षा