ग्रंथसार
क्या मन का शांत होना कोई उपलब्धि है, या यह बस एक स्वाभाविक अवस्था है जो शोर के थम जाने पर स्वयं प्रकट हो जाती है?
अष्टांग योग · पाठ 11
चित्त की एकाग्रता: स्थिरता का अभ्यास