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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

अष्टांग योग

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  1. ॐयोग का अर्थपाठ 1
  2. ॐयम: संयम के नियमपाठ 2
  3. ॐनियम: साधना की नीवपाठ 3
  4. ॐआसन: स्थिरता का आधारपाठ 4
  5. ॐप्राणायाम: चेतना का सेतुपाठ 5
  6. ॐप्रत्याहार: इंद्रियों का निग्रहपाठ 6
  7. ॐधारणा: एकाग्रता का अभ्यासपाठ 7
  8. ॐध्यान: निरंतरता का प्रवाहपाठ 8
  9. ॐसमाधि: स्वयं में विलीन होनापाठ 9
  10. ॐमार्ग की बाधाएं: अंतरायपाठ 10
  11. ॐचित्त की एकाग्रता: स्थिरता का अभ्यासपाठ 11
  12. ॐअष्टांग का सामंजस्य: एक अखंड मार्गपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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