ग्रंथसार
क्या शरीर की निश्चलता ही वास्तव में मन के मौन का द्वार है? आइए, गुरु-शिष्य के इस संवाद से समझें आसन के गहरे अर्थ को।
अष्टांग योग · पाठ 4
आसन: स्थिरता का आधार