ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि इंद्रियों का निग्रह कर लेना ही स्वयं के भीतर छिपे परम आनंद का द्वार खोल देता है?
अष्टांग योग · पाठ 6
प्रत्याहार: इंद्रियों का निग्रह