ग्रंथसार
एकाग्रता की इस यात्रा में, मन को थकाना नहीं, बल्कि उसे एक शांत सरोवर की भाँति स्थिर करना ही सच्ची सिद्धि है।
अष्टांग योग · पाठ 7
धारणा: एकाग्रता का अभ्यास