ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि दो विचारों के मध्य जो अदृश्य रिक्तता है, वही आपके अस्तित्व का असली द्वार है?
ध्यान और मंत्र · पाठ 7
विचारों के बीच का मौन