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ध्यान और मंत्र
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ध्यान और मंत्र

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

ध्यान और मंत्र

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  1. ॐस्थिर बैठने की कलापाठ 1
  2. ॐसमय और स्थान का महत्त्वपाठ 2
  3. ॐश्वास: ध्यान का आधारपाठ 3
  4. ॐमंत्र: चेतना का सूत्रपाठ 4
  5. ॐजप और माला का अर्थपाठ 5
  6. ॐमन का भटकना और वापसीपाठ 6
  7. ॐविचारों के बीच का मौनपाठ 7
  8. ॐअभ्यास का नैतिक आधारपाठ 8
  9. ॐशांति को जीवन में उतारनापाठ 9
  10. ॐशांति का केंद्र: एक निरंतर यात्रापाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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