ग्रंथसार
गुरुदेव, संसार की इस भागदौड़ में मन बार-बार भटक जाता है, क्या कोई ऐसा आधार है जो कभी नहीं बदलता?
ज्ञान साधना · पाठ 4
नित्य और अनित्य का विवेक