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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐजिज्ञासा का उदयपाठ 1
  2. ॐसुनने की कलापाठ 2
  3. ॐमनन और चिंतनपाठ 3
  4. ॐनित्य और अनित्य का विवेकपाठ 4
  5. ॐवैराग्य: आंतरिक स्वतंत्रता का उदयपाठ 5
  6. ॐगुरु का स्थान और मार्गदर्शनपाठ 6
  7. ॐमहा-प्रश्न: स्वरूप की खोजपाठ 7
  8. ॐमौन की शक्तिपाठ 8
  9. ॐआचरण में ज्ञानपाठ 9
  10. ॐज्ञान साधना का मार्ग: श्रवण, मनन और निदिध्यासनपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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