ग्रंथसार
गुरु का सान्निध्य वह शीतल छाया है, जहाँ शिष्य का अहंकार विलीन होकर आत्म-बोध के अंकुर को जन्म देता है।
ज्ञान साधना · पाठ 6
गुरु का स्थान और मार्गदर्शन