ग्रंथसार
क्या पूजा-पाठ और घर की गृहस्थी के काम अलग-अलग हैं, या ये दोनों एक ही ईश्वर के समर्पण के धागे हैं?
व्रत, पूजा और नित्य कर्म · पाठ 10
नित्य भक्ति का पूर्ण पथ