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व्रत, पूजा और नित्य कर्म
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व्रत, पूजा और नित्य कर्म

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

व्रत, पूजा और नित्य कर्म

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  1. ॐव्रत का अर्थपाठ 1
  2. ॐनित्य पूजा का स्वरूपपाठ 2
  3. ॐसंध्या और स्मरणपाठ 3
  4. ॐघर का देवालय और अर्पणपाठ 4
  5. ॐसाप्ताहिक और मासिक नियमपाठ 5
  6. ॐतीर्थयात्रा एक साधना के रूप मेंपाठ 6
  7. ॐअतिथि देवो भवपाठ 7
  8. ॐआडंबर से परे सरलतापाठ 8
  9. ॐनित्य कर्म एक आधारशिलापाठ 9
  10. ॐनित्य भक्ति का पूर्ण पथपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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