ग्रंथसार
नित्य पूजा मात्र एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन को प्रभु के प्रकाश से जोड़ने का एक सहज मार्ग है।
व्रत, पूजा और नित्य कर्म · पाठ 2
नित्य पूजा का स्वरूप