ग्रंथसार
क्या तीर्थयात्रा केवल देव-दर्शन की दौड़ है, या अपने भीतर छिपे परम तत्व तक पहुँचने का कोई गुप्त मार्ग?
व्रत, पूजा और नित्य कर्म · पाठ 6
तीर्थयात्रा एक साधना के रूप में