ग्रंथसार
हमारा प्रत्येक कर्म, चाहे वह कितना ही साधारण क्यों न हो, जब कर्तव्य भाव से किया जाता है, तो वह स्वयं में एक यज्ञ बन जाता है।
गृहस्थ जीवन · पाठ 10
दैनिक कर्म में धर्म