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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐगृह-मंदिर का दिव्य आलोकपाठ 1
  2. ॐनित्य संध्या और प्रभात वंदनपाठ 2
  3. ॐभोजन: प्रसाद और संयमपाठ 3
  4. ॐउपवास: सरल संयम और आत्म-शुद्धिपाठ 4
  5. ॐअतिथि देवो भव: सेवा का संस्कारपाठ 5
  6. ॐविवाह और पारिवारिक दायित्व: एक साझा यात्रापाठ 6
  7. ॐसंस्कार और संतानपाठ 7
  8. ॐवृद्धजनों की सेवा और सम्मानपाठ 8
  9. ॐपितृ-स्मरण और कृतज्ञतापाठ 9
  10. ॐदैनिक कर्म में धर्मपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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