ग्रंथसार
दिन की शुरुआत और अंत में की जाने वाली छोटी प्रार्थनाएं हमारे समय को पवित्रता के धागे में पिरो देती हैं।
गृहस्थ जीवन · पाठ 2
नित्य संध्या और प्रभात वंदन