ग्रंथसार
बच्चों का पालन-पोषण केवल उनकी शारीरिक वृद्धि नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपे ईश्वरत्व को निखारने का एक पुनीत अवसर है।
गृहस्थ जीवन · पाठ 7
संस्कार और संतान