ग्रंथसार
एक कुशल कथा-वाचक केवल शब्दों को नहीं सुनाता, बल्कि वह श्रोता की चेतना को अपने साथ एक अदृश्य सूत्र में पिरो लेता है।
कथा परम्परा · पाठ 2
कथा-वाचक की कला और श्रोता