ग्रंथसार
श्रीकृष्ण की लीलाएं हृदय के उस कोने को छू लेती हैं जहाँ केवल प्रेम और समर्पण का वास होता है।
कथा परम्परा · पाठ 4
भागवत-कथा का प्रवाह