ग्रंथसार
कथा-वाचक की स्मृति केवल ग्रंथों का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान की जीवंत धड़कन है।
कथा परम्परा · पाठ 8
स्मृति और ततक्षण रचना: जीवित परम्परा