ग्रंथसार
सुनना केवल कानों का काम नहीं, बल्कि मौन होकर हृदय के द्वार खोलने की एक गहरी तपस्या है।
कथा परम्परा · पाठ 9
श्रवण: एक आध्यात्मिक साधना