ग्रंथसार
ईश्वर की अनंत लीलाओं को स्वीकार करना ही इन आचार्यों के भक्ति-मार्ग का सार है।
आचार्य परम्परा · पाठ 5
निम्बार्काचार्य और वल्लभाचार्य: भक्ति और लीला का मार्ग