ग्रंथसार
ईश्वर के नाम में ही सारा जगत समाहित है, यह चैतन्य का अनुभवपूर्ण संदेश था।
आचार्य परम्परा · पाठ 6
चैतन्य महाप्रभु और नाम-संकीर्तन का माधुर्य