ग्रंथसार
आचार्य की वाणी केवल शब्दों में नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित मठों और उनके शिष्यों के जीवन में जीवित रहती है।
आचार्य परम्परा · पाठ 7
मठ और गुरु-शिष्य परंपरा