ग्रंथसार
शास्त्रार्थ का वास्तविक उद्देश्य विजय प्राप्त करना नहीं, बल्कि परस्पर संवाद के माध्यम से सत्य के निकट पहुँचना था।
आचार्य परम्परा · पाठ 9
शास्त्रार्थ: आदर और संवाद की संस्कृति