ग्रंथसार
गंगा की पवित्र धारा के तट पर, जहाँ संतों की वाणी युगों-युगों से गूँजती रही है, उसी पावन भूमि हरिद्वार में आज भी एक ऐसी ही ज्योति प्रज्वलित है।
स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज · पाठ 1
परिचय: जूना अखाड़े के आचार्य