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स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज
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स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज

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  1. ॐपरिचय: जूना अखाड़े के आचार्यपाठ 1
  2. ॐवैराग्य की पुकारपाठ 2
  3. ॐहिमालय में साधना के वर्षपाठ 3
  4. ॐआदि शंकराचार्य की विरासतपाठ 4
  5. ॐजूना अखाड़ापाठ 5
  6. ॐहिमालय से अखाड़े तक का सफरपाठ 6
  7. ॐहरिहर आश्रम और हरिद्वार का जीवनपाठ 7
  8. ॐप्रभु प्रेमी संघ: चार स्तंभपाठ 8
  9. ॐदैनिक जीवन के लिए वेदांतपाठ 9
  10. ॐविरासत: कुम्भ, सेवा और आज के साधकों का मार्गपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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