ग्रंथसार
हर महान आध्यात्मिक यात्रा का आरम्भ एक आंतरिक पुकार से होता है, एक ऐसी प्यास से जो सांसारिक वस्तुओं से नहीं बुझती।
स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज · पाठ 2
वैराग्य की पुकार