ग्रंथसार
और वह यात्रा उन्हें सीधे देवभूमि हिमालय के विराट एकांत में ले गई, जहाँ एक युवा संन्यासी का आत्म-अन्वेषण गहन तप में परिवर्तित हो गया।
स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज · पाठ 3
हिमालय में साधना के वर्ष