ग्रंथसार
स्वामी जी जिस मार्ग पर चले, वह उस महान दशनामी संन्यासी परंपरा का हिस्सा है जिसकी नींव स्वयं आदि शंकराचार्य ने रखी थी।
स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज · पाठ 4
आदि शंकराचार्य की विरासत