ग्रंथसार
उनके उपदेशों का अमृत हमें यह सिखाता है कि अध्यात्म कहीं दूर वनों या गुफाओं में नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर और हमारे हर कर्म में छिपा है।
स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज · पाठ 9
दैनिक जीवन के लिए वेदांत