ग्रंथसार
आकाश के विस्तार को देखना केवल नेत्रों का कार्य नहीं, अपितु समय की गति को समझने वाली अंतर्दृष्टि का उदय है।
ज्योतिष · पाठ 1
वेद का चक्षु