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12 पाठ · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐवेद का चक्षुपाठ 1
  2. ॐगणित, होरा और संहितापाठ 2
  3. ॐअनुष्ठान का कालचक्रपाठ 3
  4. ॐनक्षत्र और चंद्र मासपाठ 4
  5. ॐतिथि और पंचांगपाठ 5
  6. ॐराशि और भावपाठ 6
  7. ॐग्रह और प्रभाव का स्वरूपपाठ 7
  8. ॐमुहूर्त और सही समय का बोधपाठ 8
  9. ॐखगोलविद का गणित और पंचांगपाठ 9
  10. ॐभय और नियतिवाद के प्रति सावधानीपाठ 10
  11. ॐज्ञान का संधारण और उत्तरदायित्व का बोधपाठ 11
  12. ॐआकाश का पठन और काल का बोधपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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