ग्रंथसार
आकाश के संकेतों को पढ़ना एक विद्या है, किंतु उन संकेतों के बीच अपने विवेक को जीवित रखना ही एक साधक का वास्तविक उत्तरदायित्व है।
ज्योतिष · पाठ 11
ज्ञान का संधारण और उत्तरदायित्व का बोध