ग्रंथसार
ज्योतिष की यह पूरी यात्रा हमें सिखाती है कि आकाश केवल तारों का समूह नहीं, बल्कि काल की अखंड और निरंतर बहती हुई नदी है।
ज्योतिष · पाठ 12
आकाश का पठन और काल का बोध