ग्रंथसार
आकाश के नक्षत्र जब समय की धुरी बनते हैं, तब मनुष्य का प्रत्येक कार्य एक अनुष्ठान की गरिमा प्राप्त कर लेता है।
ज्योतिष · पाठ 3
अनुष्ठान का कालचक्र