ग्रंथसार
पंचांग केवल पन्नों पर अंकित गणनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि पांच अंगों के माध्यम से जीवन के स्पंदन को काल की धुरी पर बिठाने का एक यत्न है।
ज्योतिष · पाठ 5
तिथि और पंचांग