ग्रंथसार
सात स्वरों का संसार प्रकृति की उस व्यवस्था का दर्पण है, जिसमें हर स्वर एक विशिष्ट ऊर्जा का प्रतीक है।
संगीत शास्त्र · पाठ 2
सात स्वर और सप्तक की अवधारणा