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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐनाद और श्रुति का उद्भवपाठ 1
  2. ॐसात स्वर और सप्तक की अवधारणापाठ 2
  3. ॐराग का स्वरूप और उसकी व्यापकतापाठ 3
  4. ॐताल और चक्र का अनुशासनपाठ 4
  5. ॐतनपुरा और आधार स्वर की गूँजपाठ 5
  6. ॐशास्त्रीय ग्रंथ और स्मृति की परंपरापाठ 6
  7. ॐध्रुपद और खयाल की धाराएँपाठ 7
  8. ॐभक्ति-गीत और साधनापाठ 8
  9. ॐकर्नाटक संगीत की धारा और उसकी शब्दावलीपाठ 9
  10. ॐगुरु-शिष्य परंपरा और सीखने का मार्गपाठ 10
  11. ॐश्रवण: ध्यान का एक स्वरूपपाठ 11
  12. ॐसंगीत: अनुशासन, अर्पण और ध्यानपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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