ग्रंथसार
ध्रुपद की अचल गंभीरता और खयाल की गतिशील उड़ान भारतीय संगीत की दो पूरक अनुभूतियाँ हैं।
संगीत शास्त्र · पाठ 7
ध्रुपद और खयाल की धाराएँ