ग्रंथसार
एक नगर केवल सड़कों का जाल नहीं, बल्कि एक बड़ा परिवार है जिसे वास्तु के सूत्रों ने एक धागे में पिरोया है।
वास्तु शास्त्र · पाठ 8
गाँव और नगर: व्यवस्थित विस्तार