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12 पाठ · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐआवास का अनुशासनपाठ 1
  2. ॐवास्तु पुरुष मंडलपाठ 2
  3. ॐतत्वों का संतुलन: प्रकाश, वायु और जलपाठ 3
  4. ॐआंगन और देहरीपाठ 4
  5. ॐरसोई और अग्निपाठ 5
  6. ॐपूजा स्थलपाठ 6
  7. ॐमंदिर निर्माण में अनुपात और मापपाठ 7
  8. ॐगाँव और नगर: व्यवस्थित विस्तारपाठ 8
  9. ॐशिल्पी का अनुशासनपाठ 9
  10. ॐसिद्धांत और अंधविश्वास का भेदपाठ 10
  11. ॐआधुनिक अपार्टमेंट में वास्तुपाठ 11
  12. ॐसहजता और शांति के लिए स्थान का विन्यासपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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