ग्रंथसार
हाथ में छीनी और मन में एकाग्रता—एक शिल्पकार पत्थर में भी प्राण फूंक सकता है यदि वह स्वयं अनुशासित है।
वास्तु शास्त्र · पाठ 9
शिल्पी का अनुशासन