ग्रंथसार
क्या तीर्थ की यात्रा मात्र किसी स्थान विशेष तक पहुँचने का नाम है, या यह भीतर की ओर मुड़ने वाली एक अंतहीन प्रक्रिया है?
चार धाम · पाठ 10
एकीकृत यात्रा: गंतव्य से परे का अनुभव