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चार धाम

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

चार धाम

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  1. ॐधाम का अर्थपाठ 1
  2. ॐचार दिशाएं और उनका महत्वपाठ 2
  3. ॐबदरीनाथ: उत्तर का पावन धामपाठ 3
  4. ॐद्वारका: पश्चिम का द्वारपाठ 4
  5. ॐपुरी: करुणा का धामपाठ 5
  6. ॐरामेश्वरम: भक्ति का सेतुपाठ 6
  7. ॐछोटा चार धाम: हिमालय की गोदपाठ 7
  8. ॐयात्रा की भावना और तपस्या का अनुशासनपाठ 8
  9. ॐक्या खोजते हैं भक्त: एक नई दृष्टि का उदयपाठ 9
  10. ॐएकीकृत यात्रा: गंतव्य से परे का अनुभवपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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