ग्रंथसार
क्या तुमने कभी कल्पना की है कि हिमालय की उन गगनचुंबी शिखरों के बीच, जहाँ समय स्वयं ठहर जाता है, कौन सी दिव्य शांति प्रतीक्षा कर रही है?
चार धाम · पाठ 3
बदरीनाथ: उत्तर का पावन धाम